Thursday, February 9, 2012

आज भी मैँ वहीँ हुँ






माँ!
कल मेरा जन्मदिन है,
मुझे पता है
कि ये बात तुम जानती हो
लेकिन ये नही
कि मै कितना बडा हो गया हुँ।
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बडा होना
ये कबसे मेरी चाहत थी,
लेकिन कभी समझ नही पाया
कि बडा होना
और वक्त का गुजरना
साथ साथ सफर करता है।
**
बडा हो गया हुँ
बस् एक एहसास हि तो है
नही तो और क्या है?
**
हाँ कुछ बदलाव देखा है मैने
जैसा कि मुछेँ
जैसा कि अलग ईच्छाएँ
उमरके साथ-साथ
कुछ अजीब दर्दको पास आते देखा है
और खुलकर रो नहीँ पाता
बडोँको छुपकर रोना पड्ता है।
हाँ माँ!
आजकल मै रोता नही।
तुम भी मुझपर चिल्लाती नहीँ।
**
जी चाहता हैँ
उछलता रहुँ जङ्गल,खेत खलियानोँ मे।
मचलता रहुँ मस्त नदी, गलियोँ, हवावोँ मे।
कर नहीँ पाता ये सब
चेहरा अजीब कोहरेसे ढका है।
दिलके
उपर बैठा है तानाशाह दिमाग।
मै बडा हो गया हुँ माँ।
**
सो नही पाता
कोई भी मुझे अब
परियोँ कि कहानी सुनाते नही
हर वक्त बजती है मोबाईलकी रिङ्टोन
ओर दिलमे धडकता है एक परेसान बच्चा
जिसे हर दिन हर रात
मारता रहता है
बाजार, महंगाई,और पैसे कि जिल्लत।
हाँ माँ!
वो बच्चा सचमुच मर चुका है।
और उसकी भट्की हुई आत्मा
बडा बन चुका है।
**
वैसे
ये मेरी कहानी है
लेकिन सिर्फ मेरी नहीँ
हम सबकी कहानी है
जब छोटे थे
बडा बनने कि चाहत थी
जब बडे बन गए
हम अपने चाहत को ही भूल गए।
माँ
मुझे मत देखो
बस मुझे तुमको देखने दो
कैसे दबा लेती हो ईतनी सिकन?
तुम्ही मेरी माँ हो
हाँ माँ
तुम्ही मेरी मा होने के काबिल हो।
**
अब देखो माँ
मै हँस रहा हुँ
अगर नही तो भी जरुर हँसुगा।
देखा माँ
मै कितना बडा हो गया।
लेकिन माँ
आज भि मै वहीँ हुँ।
वहीँ तो हुँ।

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