Thursday, February 9, 2012

खेल खेलमे




चलो
आज खेलते है
आँखे बन्द करो
और
तुम ईन मिट्टी से पुछो
सबसे बडा ईन्सान कौन है?
**
फिर हम नहायेँगे
उन बहती हुई झरना मे
क्या वो जानता होगा
हम क्या हैँ?
क्या वो भि खिच लेगा अपनी बाहेँ?
**
सुना तुमने?
अब पानी किसीका नही रहेगा
सुना है पानी सरकारका भी नही रहेगा
पानी खुद अपना भी नही रहेगा।
**
चलो ना
देखो चाँद कितना बडा है आज
हमारा माजी पिताजी
वहीँ तो होँगे
या कहीँ ओर
बस देखो तो
अगर मा होती तो
ऐसी हि दिखती।
**
भुख लग रहा है
चलो कुछ डुँडते हैँ
लेकिन क्या?
ऐसा करेँ...
जोडो ना हाथ
'हे मालिक!
आजका भरोषा नहीँ
कल तक रहेँगे या नही
बस! आज पहली बार सुनलो
खानेको कुछ तो दो।'
**
सो मत जाना
सो मत जाना
उठो ना
मुझे डर लग रहा है
देखो
सब सो रहे हैं
हमे जगना है।

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